motivational shayari Awesome2017

⧪हो के मायूस ना यून शाम से ढलते रहिए⧪
⧪ज़िंदगी भोर है सूरज सा निकलते रहिए⧪
⧪एक ही पावं पे ठहरोगे तो थक जाओगे⧪,
⧪धीरे-धीरे ही सही राह पे चलते रहिए⧪


⧬⧬⧬सामने हो मंज़िल तो रास्ते ना मोड़ना,
जो भी मॅन में हो वो सपना ना तोड़ना,
कदम कदम पे मिलेगी मुश्किल आपको,
बस सितारे चुन-ने के लिए कभी ज़मीन मत छोड़ना.


कुछ कर के दिखा दिया, की काम बहुत हैं,
इस जहाँ मैं जीतने वाले मुक़ाम बहुत हैं,
मुकम्मल शख्स वही जो दुनिया को बदल डाले, रोज़ मार मिटाने वाले नाम बहुत हैं.


नज़र को बदलो तो नज़ारे बदल जाते है,
सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते है,
कश्ती बदल ने की ज़रूरत नही,
दिशा को बदलो तो किनारे खुद-ब-खुद बदल जाते है.


होसले बुलंद कर रास्तों पर चल दे,
तुझे तेरा मुकाम मिल जाएगा,
अकेला तू पहल कर,
काफिला खुद बॅन जाएगा,
मायूस होकर ना उमीदों का दामन छोर,
वरना खुदा नाराज़ हो जाएगा,
⧬⧬ठोकरो से ना तू घबरा,
हर पड़ाव पर अपने आप को और मज़बूत पाएगा,
नाकामयाबी की धुन्द से ना घबराना,
कामयाबी का सूरज तेरी तकदीर रोशन कर जाएगा.


⧬⧬पर हर छोटे से लम्हे को तू जी भर के जी ले,
ख्वाब सी इस ज़िंदगी में, ख्वाब ऐसे बुन,
की लेके रुखसत इस जहाँ से खुले जब आँखें तेरी
तब कर खुदा से सामना कभी झुके ना तेरी नज़र......


हवाओं से कह दो अपनी औकात में रहे
हम पैरो से नही होसलो से उड़ा करते हैं


⧬⧬साथ नही रहने से रिश्ते नही टूटा करते
वक़्त की धून्द से लम्हे नही टूटा करते
लोग कहते हे मेरा सपना टूट गया
टूटी नींद है सपने नही टूटा करते


निगाहो में मंज़िल थी,
गिरे और गिर कर संभालते रहे,
हवाओ ने बहुत कोशिश की,
मगर चिराग आँधियो में भी जलते रहे.


अगर आँखें तेरी ज़िंदा है
तो इन्न में ख्वाब भी ज़िंदा रख
मायूसी ले जाती है कुफ्र की जानिब
हरदम उम्मीद-ए-फ़तह रख
रागों में जब खून रवाँ है अब तक
तो कोशिशें अपनी रवाँ रख
ना उम्मीद ले जाती है नाकामी के जानिब
उमंगें अपनी जवान रख.


⧬⧬⧬आबरे रहमत तेरी चोखत पे बरसती नज़र आए
हर लम्हा तेरी तक़दीर सावर्ती नज़र आए
बिन माँगे तुझे मिले तू जो चाहे
दुआ खुद तेरे हाथों को तरसती नज़र आए


साहिल जो समझ ले मौजों को
क्या ख़ौफ़ उसे तूफ़ानो से
मर कर ही तो जीना है
जीना है यह सिख लिया परवानो से


⧬⧬मंज़िल उन्ही को मिलती है
जिनके सपनो मे जान होती है
पंख से कुच्छ नही होता
हौसलों से उड़ान होती है


⧬⧬⧬ज़िंदगी से ना रखो कभी कोई शिकायत तुम
⧬⧬⧬यह हस्ने के देगी मौके हज़ारों तुम्हें
मुक़ाबला करो हस्सके परेशानीू का तुम
अगर मुसीबत आए कोई जो ज़िंदगी में तुम्हें
जो ऐसी सोच रखोगे हर बार तुम
सफलता मिलेगी ही आख़िरकार तुम्हें
हँसने के मौके देगी ज़िंदगी बार बार तुम्हें.



⧬⧬राह में काँटे एक दो नही होते
राह काँटों से भारी होती है
मंज़िल उस राह के आख़िरी छोर पर खड़ी होती है
जहाँ हर कदम पर मिलती एक नयी चौटी है
देख उसे जिनके हौंसले डगमगाते हैं
वे मंज़िल को भुला काँटों में उलझ जाते हैं
जिनकी निगाह मंज़िल पर होती है
वे काँटों पे ही चलकर मंज़िल को पाते हैं

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