best gila shikwa shayari in Hindi2017

लोग कहते हैं की बदनामी से बचना चाहिए,
कह दो बे इस के जवानी का मज़ा मिलता नही!



हमारे चले जाने के बाद यह समंदर की रेत भी तुमसे पूछा करेगी,
कहाँ चला गेया वो शख्स जो तन्हाई में आ कर बस तुम्हारा ही नाम लिखा करता था


मेरी चाहत का सर-ए-आम तो चर्चा ना करो,
कम तो पहले भी नहीं और तो रुसवा ना करो!



⇑दिल से रोए मगर होंठों से मुस्कुरा बैठे,
⇎यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे,
⇎वो हूमें एक लम्हा ना दे पाए अपने प्यार का,
⇎और हम उनके लिए अपनी ज़िंदगी लूटा बैठे!



⇴ले दे के अपने पास फ़ाक़ात एक नज़र तो है,
⇵क्यों देखे ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम!



इश्क़ का बटवारा रज़ामंदी से हुआ,
चमक उन्होने बटोरी तन्हाई हम ले आए!


कितना बदलू खुद को तेरे लिए,
कुछ तो मेरे अंदर मेरा रहने दे!


लगा कर आग सीने में चले हो तुम कहाँ;
अभी तो राख उड़ने दो तमाशा और भी होगा!


अब कौन से मौसम से कोई आस लगाए;
बरसात में भी याद ना जब उन को हम आए!


वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी;
वो अपनापन और ठुकराने की अदा भी तेरी थी;
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ़ किससे माँगते,
वो शहर भी तेरा था और अदालत भी तेरी थी!

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