Sunday, 26 March 2017

तन्हाई की यह कुछ ऐसी अजब

तन्हाई की यह कुछ ऐसी अजब रात है;
तुझसे जुडी हुई हर याद मेरे साथ है;
तड़प रहा है तनहा चाँद बिना चांदनी के;
इस अंधेरी रात में आज कुछ और बात है⧭⧭⧭

No comments :