Sunday, 26 March 2017

जुदा ख्यालों से मैं बिखर जाता हूँ

होते ही शाम मैं किधर जाता हूँ;
जुदा ख्यालों से मैं बिखर जाता हूँ;
खौफ इस कदर होता है यादों का;
जाम की महफिल में नजर आता हूँ↬↬↬

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