Tuesday, 28 February 2017

यह उड़ी-उड़ी सी रंगत

➛यह उड़ी-उड़ी सी रंगत,
➛ये खुले-खुले से गेसूं;
➛तेरी सुबह कह रही है,
➛तेरी रात का फसाना...

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