Wednesday, 7 December 2016

Hindi Shayari Kagaz Ki Kashti


  1. कागज़ की कश्ती से पार जाने की ना सोच,
  2. चलते हुए तुफानो को हाथ में लाने की ना सोच,
  3. दुनिया बड़ी बेदर्द है, इस से खिलवाड़ ना कर,
  4. जहाँ तक मुनासिब हो, दिल बचाने की सोच।

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